आदिवासी स्कूली शिक्षा में स्वत्व और पहचान का पनुर्निर्माण

मदान, अमन (2021) आदिवासी स्कूली शिक्षा में स्वत्व और पहचान का पनुर्निर्माण. लर्निंग कर्व (2).

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Abstract

्षा के दैनिक जीवन-अनभवों के सम ु ाजशास्त्रीय अध्ययन ने हमारी इस समझ को समद्ध ृ किया है कि विद्यार्थी कै से सीखते हैं, या नहीं सीखते । बच्चे यां त्रिक जीव नहीं हैं । वे शिक्षकों और स्कूली विषयों से सम्बद्ध अपनी भावनाओ और विचारों को सामाजिक अन्त:क्रियाओं के सिलसिलों के माध्यम से निर्मित करते हैं। यह तो समाज में होने वाले अनभव ही हैं जो एक बच् ु को यह महस चे स कर ू ने की ओर ले जा सकते हैं कि भगोल बोर ू ियत पैदा करने वाला, जबकि इतिहास एक रोचक विषय है  । जिस बच्ची के घर में वही भाषा बोली जाती है जो स्कूल में प्रयोग होती है और घर में इतिहास से सम्बद्ध वैचारिक चर्चा और बहस भी होती है, स्कूल में भी इतिहास उस बच्ची का ध्यान आकर्षित करेगा । वह शिक्षक और कक्षा के सामने अपनी बात रख सके गी और शायद ऐसी बातें भी करेगी जिनके बारे में अन्य लोगों को जानकारी न हो, और इस प्रकार वह बाक़ी कक्षा का आदर भी जीत पाएगी । उसका आत्म-सम्मान बढ़ेगा । लेकिन जिस बच् के पर चे िवार में कक्षा में इस्तेमाल होने वाली भाषा का प्रयोग नहीं होता, उसकी हालत ठोकर खाते, अन्रे में ह धे ाथ-पैर मारने वाले व्यक्ति जैसी होगी । मिसाल के तौर पर, उसने अगर आर्यभट्ट के बारे में पहले नहीं सना ु होगा तो शायद उसे चप ु्पी साधनी पड़ेगी और ममुकिन है कि वह बाक़ी कक्षा की उत्साह भरी बातों के बीच बेइज़्ज़त भी महसस करे ू ।

Item Type: Articles in APF Magazines
Authors: मदान, अमन
Subjects: Social sciences > Education
Divisions: ?? Hindi_LC ??
Full Text Status: Public
URI: http://publications.azimpremjiuniversity.edu.in/id/eprint/2944
Publisher URL:

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